अब आसाम नहीं, पीलीभीत के बांस से ही बनेगी बांसुरी
ब्यूरो रिपोर्ट - रोहित गौतम पीलीभीत
डीओपी में चिन्हित जिले के बांसुरी कारोबार को बढ़ावा देने के लिए जिले में डीएम ने पहले बांसुरी चौक को निर्मित कराया और अब बांसुरी कारीगरों को और अधिक लाभ देने की तैयारी है। इसी क्रम में जिले में चार प्रकार के बांस के बीज पंतनगर (उत्तराखंड) से मंगवा कर उपजाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि यह बांस के बीज बांस के पौधे बन कर दो साल में नियमित बांस मुहैया कराने लगेंगे। सामाजिक वानिकी के डीएफओ संजीव कुमार ने बताया कि हम जल्द ही जिले को यह खास सौगात देंगे और आबोहवा भी यहां पूरी तरह से मुफीद लग रही है। मित्रसेनपुर की ग्राम समाज की पांच हेक्टेयर में 3125 पौधों को लगाया गया है। गांव अहिरवाड़ा में चार हेक्टेयर में 25 सौ पौधों को लगया गया है।
पंतनगर से यह आई हैं चार प्रजाति
पंतनगर से पीलीभीत में डेंड्रोकैलामस स्ट्रिक्टस( लाठी बांस), बैम्बूसा बैम्बोस (कंटिला बांस), बैम्बूसा बाल्कोआ (मांदा बांस), बैम्बूसा न्यूटेंस (नोडिंग बांस) शामिल है। इन बांसों की लंबाई 25 से 30 फुट होती है। डीएफओ संजीव कुमार ने बताया कि हमें उम्मीद है कि बांसुरी कारोबार में और चार चांद लगेंगे।

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