देश की सुरक्षा से ही धर्मरक्षा संभव है- श्री विमर्शसागर जी मुनिराज।
महमूदाबाद, सीतापुर। उत्तर प्रदेश के अवध प्रान्त में पं0पू0आचार्य गुरुदेव विमर्श सागर जी का प्रथम बार पदार्पण हुआ है।अभी पूज्य श्री महमूदाबाद की धरा पर अपने करुणा और वात्सल्य का अमृत लुटा रहे हैं।अब तक ऐसे प्रथम दिगम्बराचार्य हैं, जिनकी रचना - देश और धर्म के लिए जिओ,को मध्यप्रदेश शिक्षा बोर्ड ने कक्षा ग्यारहवीं की पुस्तक ' प्रकरन्द' में शामिल किया।आप देश वासियों को देशभक्ति तथा धर्मरक्षा उपदेश देते हुए कहते हैं:- देश के प्रत्येक नागरिक को सम्पूर्ण भारत वर्ष को एक परिवार की तरह स्वीकार करना चाहिए और हर परिस्थितियो में एक दूसरे का साथ देना चाहिए।एकता से ही हमारे देश की रक्षा और सुरक्षा हैं।जहाँ देश सुरक्षित है वहीं पर धर्म सुरक्षित रह सकता है। अतः देश रक्षा का पवित्र लक्ष्य हमारे आदर्श भगवान महावीर, भगवान राम, नारायण श्री कृष्ण आदि महापुरुषों ने जन्म प्राप्त किया है इस बात का हम सभी को गर्व होना चाहिए।भारत देश के प्रत्येक नागरिक का मातृभूमि की रक्षा करना ही सबसे बड़ा पर्व है ऐसे राष्ट्र पर्व के लिए सभी नागरिक जिये।आपस में सहानुभूति करुणा ,प्रेम, परस्पर सहयोग,भाईचारा और श्रेष्ठ कार्य इन्ही गुणों से हमारे देश की तथा देशवासियों की सुरक्षा है।।
रिपोर्ट-अनुज कुमार जैन

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