महमूदाबाद में उठी गूंज- "डरने की क्या बात है, गुरु विमर्श का साथ है "
परम पूज्य जिनागम पंथ प्रवर्तक भावलिंगी संत श्रम'णाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज का सन् 2021 का जिनागम पंथ प्रभावक चातुर्मास महमूदाबाद जिला सीतापुर में संपन्न हो रहा है । पूज्य आचार्य श्री के संघ में 24 पीछीधारी श्रमण श्रमणी साधनारत हैं । आपका विशाल चतुर्विध संघ पूर्णतः अनुशासन के सुंदर साँचे में ढला है अत: आप अनुशासन प्रिय कहे जाते हैं।
महमूदाबाद जैन समाज कहने को तो मात्र 60 परिवार की एक छोटी सी
समाज है किन्तु चातुमास के दौरान समाज के एक एक सदस्य की भक्ति भावना
को देखते हुए आचार्यश्री ने कहा - " लोग कहते हैं कि महमूदाबाद की जैन समाज
बहुत छोटी समाज है लेकिन मैं कहता हूँ महमूदाबाद की जैन समाज छोटी नहीं बड़ी जैन समाज है क्योंकि जिसका दिल बड़ा हो वह समाज कभी छोटी नहीं हो सकती, जिस समाज ने इतने बड़े विशाल चतुर्विध संघ का चातुर्मास कराने की प्रबल भावना रखी हो और पूर्ण उत्साह-उल्लास के साथ जो चातुर्मास को सफल बनाने में संलग्न है वह समाज कभी छोटी समाज नहीं हो सकती अत: आज से महमूदाबाद की जैन समाज बड़ी समाज कहलावेगी
कैसे जागी चातुर्मास कराने की
प्रबल भावना-
परम पूज्य भावलिंगी संत श्री का ग्रीष्म काल प्रवास के दौरान समाज के प्रत्येक सदस्य को जब चतुर्विध संघ का अनुशासन और अभूतपूर्व वात्सल्य भाव देखने को मिला तभी से सम्पूर्ण समाज ने अपने अपने मन में यह भावना जागृत कर ली थी कि चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन गुरुदेव का चातुमास महमूदाबाद में ही कराना है । दुनियाँ की नजरों में हम भले ही मुट्ठी भर हों लेकिन हम सब एक मुट्ठी हैं, हम सब एक हैं और एकता-संगठन ही बलबान होता है । "जहाँ बड़ी-बड़ी समाजें भी दो सतों के आगमन में विचार में पड़ जाती है कि इतनी बड़ी व्यवस्था कैसे होगी, वहीं महमूदाबाद के छोटे से बाल शिशु से लेकर वृद्ध जन भी एक ही आवाज लगाते हैं - "डरने की क्या बात है, गुरु विमर्श का साथ है"। और तीनों काल गुरु सेवा तन-मन-धन से तत्पर रहते हैं और करते हैं अपने सौभाग्य की सराहना !
अनुज कुमार जैन (महमूदाबाद)

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