गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का 66 वां आर्यिका दीक्षा दिवस मनाया गया
जम्बूद्वीप रचना 37 वां प्रतिष्ठापना दिवस सम्पन्न
राजधानी दिल्ली के कनाट पैलेस स्थित जैन हैप्पी स्कूल में वर्चुअल आर्यिका दीक्षा दिवस एवं जम्बूद्वीप रचना का 37वां प्रतिष्ठापना दिवस मनाया गया। जिसमें
मुख्यरूप से प्रज्ञाश्रवणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी के द्वारा बाल रक्षा कबच एवं जम्बूद्वीप रचना की पूजन सम्पन्न कराई गई। भगवान ऋषभदेव चूम चैनल के माध्यम से लगभग एक हजार से ज्यादा लोगों ने जुड़ करके धर्म लाभ लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमान सुरेशचंद जैन कुलाधिपति तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यायल मुरादाबाद ने की। कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वनल प्रमोद जी जैन, माडल टाउन, दिल्ली ने किया। माताजी को पिच्छी प्रदान करने का सौभाग्य विजय जैन श्रीमती रश्मि जैन राजपुर रोड, दिल्ली ने प्राप्त किया। कमंडलु प्रदान करने का सौभाग्य शरदराज कासलीवाल ध.प. श्रीमती रजनी कासलीवाल, रोहिणी, दिल्ली ने प्राप्त किया एवं चरण प्रक्षाल करने का सौभाग्य श्रीमती कुसुमलता जैन ध.प. स्व: लाला महावीरप्रसाद जैन (पूर्व संघपति) साउथ एक्स दिल्ली ने। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य कमलचंद कैलाशचंद पुरूषोत्तमदास जैन, दिल्ली ने प्राप्त किया।
संस्थान के मंत्री विजय कुमार जैन ने बताया कि पूज्य गणिनी ज्ञानमती माताजी की पूजन का सौभाग्य जूम एप के माध्यम से कर्नाटक, महाराष्ट्र के भक्तगणों ने प्राप्त किया। जिसमें मुख्यरूप से प्रतिष्ठाचार्य पं. दीपक उपाध्ये ने पूजन के कार्यक्रम का संचालन करते हुए सुंदरता पूर्वक पूजन सम्पन्न कराई। जम्बूद्वीप रचना की पूजन विजय कुमार जैन व डा. जीवनप्रकाश जैन ने सम्पन्न करावाई। समस्त ब्रह्मचारिणी बहनों ने इस अवसर पर पूज्य माताजी को शास्त्र प्रदान किया।
इस अवसर पर चारित्रचक्रवर्ती आचार्य की अक्षुण परम्परा के सप्तम पट्टाचार्य आचार्य श्री अनेकांतसागर जी महाराज ने अपना मंगल आशीर्वाद जूम के माध्यम से प्रदान किया। आचार्य श्री इस समय उ.प्र. के कानपुर नगर में विराजमान है। इस अवसर पर प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने पूज्य बड़ीमाताजी जी को पिच्छी प्रदान की एवं शास्त्र प्रदान करने का सौभाग्य श्री विजय कुमार जैन प्रतिष्ठाचार्य जम्बूद्वीप ने प्राप्त किया। कमण्डलु प्रदान करने का सौभग्य डा. जीवनप्रकाश जैन एवं श्री संयम जैन प्राप्त किया। इस अवसर पर श्री जमनालाल जी हापावत मुम्बई ने अपनी विनयांजली प्रस्तुत की। पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी ने इस अवसर पर आशीर्वाद देते कहा कि इस समय में अपनी मां को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहूंगी कि जिन्होंने मुझे दीक्षा की अनुमति प्रदान की क्योंकि आचार्य श्री देशभूषण जी महाराज ने कहा कि जबतक आपके माता-पिता स्वीकृति नहीं प्रदान करेगें तब तक में आपको दीक्षा नहीं दूगां। इसलिए आज में इस पथ पर हूं ये उनका मेरे जीवन पर महान उपकार है। अंत में कुलाधिपति सुरेश जी जैन ने अपना वक्तव्य में पूज्य माताजी के दीर्घायु एवं स्वस्थ्यता की मंगल कामना प्रषित की। अंत में पूज्य माताजी की मंगल आरती के साथ सभा का समापन किया गया। समस्त संघस्थ आर्यिका माताजियों ने पूज्य बड़ी माताजी को शास्त्र प्रदान करके विनयांजली समर्पित की। आरती करने का सौभाग्य अनिल कुमार अनीता जैन अनामिका निकुंज, अतियश दिव्यांश जैन प्रीतविहार ने किया। समस्त कार्यक्रम का कुशल निर्देशन जगद्गुरू पीठाधीश रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने किया।
रिपोर्ट-अनुज कुमार जैन



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